योगविद्या
योग सिखलाया नहीं जाता, योग का अनुभव किया जाता है। अगर हम योग सीखते हैं, यंत्रवत् ही इसका अभ्यास करते हैं, तो इससे कोई खास फायदा नहीं होता। लेकिन यदि योग के विचारों से जुड़कर योगाभ्यास किया जाए और यौगिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाया जाए, तब योग का असर शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर पड़ता है तथा इसके प्रभाव को अपने विचार, व्यवहार और कर्मों में देखा जा सकता है। न मोक्ष योग की उपलब्धि है, न ही समाधि, बल्कि जीवन में अपनी प्रतिभाओं का सही प्रकार से उपयोग करना योग की वास्तविक उपलब्धि है। ~ स्वास्थ्य की परिभाषा ~ योग यह मानता है कि हर मनुष्य के जीवन में दो प्रधान शक्तियाँ होती है, जिनके कारण इन्द्रियाँ और मन अपना कार्य करते हैं। योग की भाषा में इन्हें सूर्यशक्ति अथवा प्राणशक्ति और चन्द्रशक्ति अथवा चित्तशक्ति कहा गया है। प्राणशक्ति का सम्बन्ध मनुष्य के शरीर के साथ, इन्द्रियों के व्यवहार के साथ होता है, और चित्तशक्ति का मन के साथ। जिस प्रकार से बाह्य इन्द्रियों को प्राणशक्ति ऊर्जा प्रदान करती है, उसी प्रकार बाह्य इन्द्रियों के आन्तरिक अनुभवों को चित्तशक्ति ऊर्जा प्रदान क...